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विकास का खाका तैयार कर जम्मू-कश्मीर के गांवों की सूरत बदलने में जुटी केंद्र सरकार


Gadwal:

विकास का खाका तैयार कर जम्मू-कश्मीर के गांवों की सूरत बदलने में जुटी केंद्र सरकार

घाटी की सूरत बदलने के लिए केंद्रनीत मोदी सरकार तमाम प्रयास कर रही है। वहां की अवाम को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार सभी सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाना चाहती है। इसके लिए सरकार की योजना सर्वप्रथम गांवों को विकास से जोड़ना है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कुछ दिनों पहले लोकसभा और राज्यसभा में बयान दिया था कि जम्मू कश्मीर प्रदेश में 40,000 गांवों के सरपंचों और पंचों को सीधे पैसे दिए जाएंगे। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि उन पैसों से वे गांव के लोगों की जरूरत के हिसाब से विकास कार्य कर सकें। ये पैसे सीधे जम्मू-कश्मीर प्रदेश के सरपंचों और पंचों के खाते में केन्द्र सरकार द्वारा पहुंचाए जाएंगे। इसमें से करीब 35,500 पंच और 4,500 सरपंच हैं, जो पंचायत चुनाव में चुने गए।

इसीको ध्यान में रखते हुए जम्मू कश्मीर के गांवों के विकास के लिए केंद्र सरकार ने 3700 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं, जिनको प्रदेश के हर एक गांव तक पहुंचाया जाएगा। पहले चरण में 700 करोड़ रुपए सरपंचों तक पहुंचाए जा चुके हैं, जबकि 1500 करोड़ रुपए दूसरे चरण में जारी किए जाएंगे। वहीं, बाकी के 1500 करोड़ रुपए तीसरे और अंतिम चरण में जारी किए जाएंगे।

ताकि निर्बाध जारी रहें सरकारी प्रोजेक्ट

सरकार चाहती है कि जो पैसा केंद्र द्वारा भेजा जाए वह रकम पारदर्शिता के साथ गांव के विकास कार्यों पर खर्च हो। सरपंच ठीक तरीके से अपने गांवों में राशि का इस्तेमाल कर सकें इसके लिए प्रदेश प्रशासन के अधिकारियों ने हर एक गांव का दौरा कर सरपंचों को ट्रेनिंग दी है कि गांव के विकास के लिए मिले पैसों को कैसे बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सके।

लोकसभा चुनाव से पहले जम्मू कश्मीर में पंचायत चुनाव हुए थे और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख इलाकों के गांवों में करीब 40,000 सरपंच और पंच चुने गए थे। गांवों में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा की गांव का विकास किया जा सके इस सोच के तहत सरकार ने से योजना बनाई है। इसके अलावा करीब 80,000 करोड़ रुपए के जो अलग-अलग प्रोजेक्ट जम्मू कश्मीर में चल रहे हैं, वे अपनी गति और योजना के मुताबिक जारी रहेंगे।

बदल सकेगी गांवों की सूरत

अगर पंचायतों की बात करें तो जम्मू कश्मीर प्रदेश में 4,483 पंचायत हैं। जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के 22 जिलों की आबादी करीब 1 करोड़ 40 लाख लोगों की है, जिसमें से करीब 80 लाख लोग 6,900 गांवों में रहते हैं। केंद्र सरकार का मानना है कि जब यह पैसा पंचों और सरपंचों तक पहुंचेगा तो वह बेहतर तरीके से अपने गांव का विकास कर सकेंगे।

सरकार की तरफ से दावा किया जा रहा है कि आजादी के बाद पहली बार जम्मू कश्मीर के गांव में पंच और सरपंच के जरिए विकास का खाका तैयार किया गया है और उनको पैसे पहुंचाए जा रहे हैं। पंच और सरपंच अपने गांव में जो भी विकास कार्य कराएंगे, जियो टैगिंग तकनीक से उसकी फोटो वह उस जगह ही खींचेंगे, जबकि इसके बाद वह जम्मू कश्मीर प्रदेश प्रशासन की वेबसाइट या फिर एप पर उन फोटो को अपलोड करेंगे।

ज्ञात हो गत दिनों गृह मंत्री अमित शाह ने कश्मीर मामले में विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि यहां अलगावादियों और देशविरोधी तत्वों पर सख्ती बरतना जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और वहां के नागरिक भारत के अपने हैं। सरकार ने वहां बिना किसी भेदभाव के सभी योजनाओं का लाभ पहुंचाया है।

बहरहाल गृहमंत्री अमित शाह ने जिस तरह से कश्मीर को अलगाववाद से इतर विकास से जोड़ने का संकल्प जताया है उससे घाटी को एक दिन दहशतगर्दी से निजात मिल सकेगी ऐसी उम्मीद की जानी चाहिए।

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