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ओपन बिल स्टॉर्क छत्तीसगढ़िया पक्षियों का बसेरा, घांेघे खाकर बचाते हैं फसल


Gadwal:

ओपन बिल स्टॉर्क छत्तीसगढ़िया पक्षियों का बसेरा, घांेघे खाकर बचाते हैं फसल

बिलासपुर | एशियन ओपन बिल स्टार्क छत्तीसगढ़ में घोंघिल पक्षी के नाम से पहचाने जाते  हैं। लंबी और आकर्षक चोंच वाले ये पक्षी बारिश शुरू होने के बाद नजर आते हैं। प्रजनन के बाद अक्टूबर में गंतव्य को चले जाते हैं। शायद इसीलिए गैर जानकारी में लोग इन्हें प्रवासी पक्षी मानने की भूल कर बैठते हैं।

घोंघिल के कुनबे का अभी खोड्री रेलवे स्टेशन के इर्द गिर्द आम, नीलगिरी, पेल्टाफोरम के पेड़ों पर बसेरा है।  वन्यजीव विशेषज्ञ प्राण चड्डा एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त संचालक राहुल सिंह की मानें तो किसानों के यह मित्र पक्षी हैं,क्योंकि यह फसल को नुकसान पहुंचाने वाले घों‌घा को खाकर मदद पहुंचाते हैं।

उन्होंने बताया कि घोंघिल का प्रजननकाल जुलाई से सितंबर है। इस दौरान यह समूह में पेड़ों में घोंसले बनाकर रहते हैं। अक्टूबर के बाद यह तालाब के किनारे या सूनी जगहों पर अलग थलग रहते हैं, इसलिए इनकी मौजूदगी लोगों की नजरों में कम ही आती है। राजिम के पास लचकेरा,पथरिया(मुंगेली) के पास पड़ियाइन सहित कोरबा, रतनपुर,  सैदा, पाली, हसदेव के किनारेे कनकी, कवर्धा, अकलतरा, नरियरा में बहुतायत से पाए जाते हैं।

भास्कर नॉलेज : कई देशों में पाए जाते हैं

घोंघिल भारत उपमहाद्वीप के साथ-साथ दक्षिण पूर्व एशिया के चीन, आस्ट्रेलिया, कंबोडिया, थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेसिशा,म्यमार, मलेशिया, फिलिंपिंस, सिंगापुर में पाए जाते हैं। इनकी 20 प्रजातियां पाई जाती है। ये बारिश के कुछ पहले पहुंचते हैं। इसलिए किसान इन्हें बारिश का सूचक मानते हैं। वैसे बारिश का संदेशा लाने वाले पक्षी में चातक या पपीहे का नाम सबसे पहले आता है।

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